Sunday, May 10, 2020

मेरी माँ

 


मेरी ऊंगलियों को थाम तूने मुझे
चलना सिखाया हैं

जिम्मेदारियों के साथ अपने पैरों पर
खुद खड़ा रहना बताया है

माँ तूने अपने हर फर्ज को निस्वार्थ
भाव से निभाया हैं

मेरी हर परेशानी का हल सिर्फ तूने
बताया है

मेरी हल्की सी खरोंच का ख्याल भी
तू करतीं हैं

खाना बनाते कभी हाथ जल जाए
यह छोटी सी चोट हैं कह कर
चूप रहतीं हैं

अपने हिस्से का भी बांट देतीं हैं
मेरी खुशी के खातिर अपनी खुशियों को
छांट देती हैं

ठंडी में मेरे लिए स्वेटर भी बुनती हैं
आज भी मुझपे क्या अच्छा लगेगा
वह कपड़े भी तू चुनती है

मेरे सर पे भगवान का हाथ है
क्योंकि भगवान का फरिश्ता बन
मेरी माँ मेरे साथ है...

1 comment: